शुक्रवार, 10 मार्च 2017

कण कण में है ईश्वर का वास

कण कण में ईश्वर का वास है प्रत्येक प्राणी के अंत करण में परमात्मा है उसे सद्गुरु हीप्रकट कर सकते हैं

 संत वह नहीं जो श्रद्धालुओं को केवल प्रभु की कथा सुनाए संत तो वह है, जो श्रद्धालुओं से कहे कि आओ मैं आपको परमात्मा का दर्शन कराता हूं लेकिन शर्त है कि प्रभु को पाना चाहते हो तो आपको धनुष रूपी अहंकार को तोडना होगा, तभी आत्मा और परमात्मा का मिलन हो सकता है

 जीवन के अभावों का समाधान सद्गुरु की शरण में जाने से मिल सकता है गुरु बिनासंसार सागर से पार होना असंभव है गुरु अध्यात्म का द्वार है