शुक्रवार, 10 मार्च 2017

आरती गणेश जी की

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

 

एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी ।

माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥

 

पान चड़ें, फूल चड़ें और चड़ें मेवा ।

लडुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥

 

अंधें को आँख देत, कोड़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

 

सूरश्याम शारण आए सफल कीजे सेवा |

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

 

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥