रविवार, 12 मार्च 2017

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

Mahakaleshwar Jyotirling

उज्जैन में शिप्रा नदी के निकट स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यता के अनुसार सच्चे मन से स्वयंभू भगवान महाकालेश्वर की पूजा-अर्चना करने वाले मनुष्य का काल भी कुछ नहीं बिगाड़ पाते।

महाकालेश्वर मंदिर की आरती

महाकालेश्वर में प्रतिदिन सुबह होने वाली भस्म आरती के बारे में एक मान्यता यह भी है कि इसको देखे बिना भगवान का दर्शन अधूरा होता है। सोमवती अमावस्या के दिन यहां पूजा करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है।

कथा

एक किवंदिती के अनुसार उज्जैन में एक समय चंद्रसेन नामक शिवभक्त राजा था। एक पांच वर्षीय गोप बालक ने जब उसे शिव अर्चना करते देखा तब उससे इतना प्रभावित हुआ कि उसने भी अपने घर में पत्थर का एक टुकड़ा स्थापित करके भगवान शिव की अर्चना शुरू कर दी। वो उसमें इतना मग्न हो गया कि खाना-पीना भी भूल गया। गुस्से में उसकी मां ने पत्थर के टुकड़े को फेंक दिया। इस पर बालक रोने लगा और रोते हुए उसने भगवान शंकर को पुकारना शुरू कर दिया। रोते-रोते बालक बेहोश हो गया।

प्रकट हुआ मंदिर: होश आने पर देखता है कि वहां महाकाल का दिव्य मंदिर खड़ा है और उसमें उसके भोला नाथ भगवान शिव का रत्नमय लिंग प्रतिष्ठित हुआ है। उसी समय भगवान हनुमान वहां प्रकट हुए और बताया कि इस बालक की आठवीं पीढ़ी में नंद के घर स्वयं नारायण श्रीकृष्ण रूप में आएंगे। कहते हैं कि स्वयं भगवान आशुतोष द्वारा स्थापित शिवलिंग ही महाकालेश्वर है