रविवार, 12 मार्च 2017

अय्यप्पा स्वामी मंदिर

Lord Ayyappa Temple

अय्यप्पा स्वामी मंदिर भारत के केरल राज्य में स्थित हिन्दुओं का एक प्रमुख धार्मिक स्थान है। यहां एक दिव्य ज्योति स्थित है, जो हर समय जलती रहती है। इस दिव्य ज्योति को मकर ज्योति कहते है। माना जाता है कि अय्यप्पा भगवान शिव और विष्णु अवतार मोहिनी के पुत्र थे। इस मंदिर को दक्षिण भारत का तीर्थ भी कहा जाता है। इस मंदिर को वैष्णव और शैव संप्रदायों की एकता का परिचायक माना जाता है। 

अय्यप्पा से जुड़ी एक कहानी
पुराणों के अनुसार अय्यप्पा शास्ता का अवतार हैं। कहा जाता है कि भगवान अय्यप्पा भगवान शिव और विष्णु के पुत्र थे। एक कथा के अनुसार एक राक्षसी महिषी को वरदान था, की उसकी मृत्यु केवल हरिहर के पुत्र के हाथों ही होगी। इसके पश्चात जब अय्यपप्पा का जन्म हुआ, तो भगवान विष्णु ने उन्हें एक नदी तट पर छोड़ दिया।

इसके बाद पंदल के राजा राजशेखरा ने अय्यप्पा का पालन पोषण किया। राजा को उससे पहले कोई पुत्र नहीं था। परंतु अय्यप्पा के आने के बाद राजा को भी एक पुत्र की प्राप्ति हुई। इसके बाद जब राज पाठ सौंपने का समय हुआ तो राजा राजगद्दी पर अय्यप्पा को बिठाना चाहते थे, लेकिन महारानी इस बात से सहमत नही थीं। 

इसके बाद महारानी ने बीमारी का बहाना करते हुए अय्यप्पा को जंगल में शेरनी का दूध लाने के लिए भेज दिया। जब अय्यप्पा जंगल में गए तो वहां उनका सामना राक्षसी महिषी से हुआ, जिसका वध करने के लिए उनका जन्म हुआ था। अय्यप्पा ने राक्षसनी का वध किया तथा शेर पर सवार होकर राजमहल लोटे।

राजा ने जब अय्यप्पा को शेर पर सवार देखा तो वह हैरान हो गया। तब अय्यप्पा ने कहा कि “अब मैं यहां नहीं रह सकता हूं मैं जा रहा हूं। तब राजा ने अय्यप्पा को देव अवतार मानते हुए इस मंदिर का निर्माण करवाया था। 

अय्यप्पा स्वामी मंदिर की विशेषता

माना जाता है कि अय्यप्पा भगवान ब्रह्मचारी हैं। इसलिए यहां महिलाओं का प्रवेश निषेध है। यहां केवल 60 साल से छोटी लड़कियां और 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं ही प्रवेश कर सकती हैं। इस मंदिर का द्वार हर धर्म के लोगों के लिए खुला रहता है। अय्यप्पा अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि हर समय बनाएं रखते हैं।

 
यहां मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए 18 पवित्र सीढियां चढ़नी होती हैं। यह सीढियां मनुष्य के 18 लक्षणों को दर्शाती हैं। हर साल मकर संक्रांति के दिन यहां एक उत्सव मनाया जाता है। इस दिन लाखों श्रद्धालु अय्यप्पा मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए इकट्ठा होते हैं।