Jagannath Temple
जगन्नाथ मंदिर उड़ीसा के पुरी शहर में स्थित हिंदुओं का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। भगवान जगन्नाथ को श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। यह मंदिर हिंदुओं के चार प्रमुख धामों में से एक है। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ के साथ-साथ उनके भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा की भी मूर्ति स्थापित है। जगन्नाथ की उत्पत्ति से संबंधित कई कथाएं लोकप्रिय हैं।
जगन्नाथ से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन भगवान जगन्नाथ की मूर्ति राजा इंद्रद्युम्न को सपने में दिखाई दी। सपने में जगन्नाथ की मूर्ति देखने के बाद राजा से रहा ना गया तथा वह कड़ी तपस्या में लीन हो गया। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए।
भगवान विष्णु ने राजा से कहा कि वह पुरी के तट पर जाए और वहां रखे एक लकड़ी के लट्ठे से उनकी मूर्ति का निर्माण करवाए। राजा उसी समय पुरी गए तथा जैसा भगवान विष्णु ने कहा था वैसा ही किया।
इसके बाद भगवान विष्णु ने मूर्तिकार का रूप धारण किया और राजा से एक शर्त रखी। उन्होंने कहा कि जब तक वह मूर्ति का निर्माण कार्य पूरा नही कर लेते, तब तक वह स्वयं को एक कमरे में बंद रखेंगें। इसके साथ ही, यह भी कहा कि इस बीच इस कमरे में कोई प्रवेश न करे।
कुछ दिनों बाद कमरे से कोई आवाज नही आई, तो राजा इंद्रद्युम्न ने कमरे के अंदर खिड़की से देख लिया। इसके बाद मूर्तिकार अदृश्य हो गया। कहा जाता है कि यह मूर्तिकार कोई और नहीं विश्वकर्मा जी थे। अधूरी मूर्तियों को देखकर राजा को बहुत दुखा हुआ। राजा को उदास देख उनसे भगवान ने स्वप्न में कहा कि मुझे इसी रूप में स्थापित करें। तब से इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ की अधूरी मूर्ति ही विराजमान है।
जगन्नाथ से जुड़ी विशेषता
पुरी में हर साल भगवान जगन्नाथ तथा उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विशाल रथ यात्रा धूम-धाम से निकाली जाती है। माना जाता है कि भगवान के दर पर सबकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। यहां हर समय भक्तजनों की भीड़ लगी रहती है। मान्यता है कि इनकी आराधना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जगन्नाथ मंदिर की एक अहम विशेषता है यहां स्थित रसोई जिसमें प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद बनता है। यह रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है।